सन् 2026 कोई साधारण वर्ष नहीं है। यह तिब्बती अश्व वर्ष है, जिसे श्रद्धालु श्रद्धा से “कैलाश का महाकुंभ” भी कहते हैं। इस वर्ष की आध्यात्मिक महत्ता बहुत अधिक मानी जाती है और इसी कारण दुनिया भर से श्रद्धालु इस यात्रा के लिए तैयारी कर रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा तिब्बत (चीन) में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक की एक पवित्र यात्रा है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। यह स्थान केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन और बोन धर्म के लोगों के लिए भी अत्यंत पवित्र है।
मानसरोवर झील को दुनिया की सबसे पवित्र झीलों में से एक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस झील में स्नान करने से व्यक्ति के पाप समाप्त हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है कैलाश परिक्रमा, जिसमें लगभग 52 किलोमीटर का कठिन ट्रैक पूरा करना होता है। यह शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को मोक्ष की यात्रा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा के साथ यह यात्रा करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
सरल शब्दों में:
बहुत से लोग बताते हैं कि यह यात्रा उनकी जिंदगी को बदल देती है।
तिब्बती परंपरा के अनुसार, हर 12 वर्षों में एक अश्व वर्ष आता है। लेकिन जब यह विशेष ग्रह योग के साथ आता है, तो इसे अत्यंत दुर्लभ और पवित्र माना जाता है।
2026 का अश्व वर्ष एक दुर्लभ संयोग है जो 60 वर्षों बाद आ रहा है।
यह शुभ काल 15 फरवरी 2026 से प्रारंभ होता है और पूरे वर्ष तक इसकी विशेष मान्यता रहती है।
सबसे खास बात:
इस अवधि में की गई एक कैलाश परिक्रमा, सामान्य समय की 13 परिक्रमाओं के बराबर पुण्य देती है
इसी कारण इसे “कैलाश का महाकुंभ” कहा जाता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा सामान्यतः मई से सितंबर के बीच आयोजित की जाती है, क्योंकि इस समय मौसम यात्रा के लिए अनुकूल होता है।
2026 के लिए संभावित समय:
हालांकि इसका आध्यात्मिक महत्व 15 फरवरी 2026 से ही शुरू हो जाता है।
इसलिए जल्दी बुकिंग करना बहुत जरूरी है क्योंकि सीटें सीमित होती हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के कई मार्ग होते हैं:
यह सबसे लोकप्रिय और आरामदायक मार्ग माना जाता है। यात्रा काठमांडू से शुरू होती है।
यह भारत सरकार द्वारा संचालित होता है और थोड़ा कठिन माना जाता है।
यह अपेक्षाकृत आसान है लेकिन इसमें सीटें बहुत सीमित होती हैं।
यह यात्रा सिर्फ घूमने के लिए नहीं होती, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव देती है।
इसमें आपको मिलता है:
यह अनुभव जीवनभर याद रहता है।
कैलाश यात्रा आसान नहीं है। यह उच्च ऊँचाई पर होती है, जहाँ ऑक्सीजन कम होती है।
इसलिए कुछ तैयारी जरूरी है:
TripKaro आपको पूरी तैयारी के लिए मार्गदर्शन देता है।
कैलाश जैसी पवित्र यात्रा के लिए एक भरोसेमंद ट्रैवल पार्टनर होना बहुत जरूरी है। TripKaro आपको एक सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव प्रदान करता है।
फ्लाइट, होटल, परमिट और ट्रांसपोर्ट सब कुछ मैनेज किया जाता है।
शुरुआत से अंत तक पूरी सहायता मिलती है।
उच्च ऊँचाई की यात्रा में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है।
बेहतर रहने और खाने की व्यवस्था की जाती है।
सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा में सीटें बहुत सीमित होती हैं, खासकर 2026 जैसे दुर्लभ वर्ष में।
डिमांड बहुत अधिक होती है, इसलिए देर करना सही नहीं है।
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं…
यह आत्मा को जागृत करने का अवसर है।
यह एक मौका है:
कहा जाता है:
“कैलाश वही जाता है जिसे भगवान शिव बुलाते हैं।”
2026 का यह दुर्लभ अवसर फिर 60 साल बाद आएगा।
अगर आपके मन में कभी कैलाश जाने की इच्छा रही है, तो यह सही समय है।
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